Ludhiana के ऐतिहासिक स्टेडियम किला रायपुर में ग्रामीण ओलंपिक के दूसरे दिन उत्साह का अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला। हजारों लोग, खासकर युवा, पंजाब की समृद्ध ग्रामीण खेल विरासत का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए।
12 साल बाद लौटी बैलगाड़ी दौड़ बनी आकर्षण का केंद्र
दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण ऐतिहासिक बैलगाड़ी दौड़ें रहीं, जो 12 वर्षों के अंतराल के बाद दोबारा शुरू हुईं। स्टेडियम जयकारों से गूंज उठा और दर्शकों ने पारंपरिक खेल की वापसी का जोरदार स्वागत किया।
बैलगाड़ी दौड़ों के अलावा हॉकी मैच, कबड्डी मुकाबले, शॉट पुट थ्रो, 100 मीटर स्प्रिंट, टग ऑफ वॉर, लंबी कूद, बाजीगर शो और कई अन्य ग्रामीण एथलेटिक प्रतियोगिताओं ने दर्शकों का मन मोह लिया। खेल मैदान परिवारों, किसानों, युवा समूहों और राज्य व बाहर से आए दर्शकों से खचाखच भरा रहा, जिससे एकता, उत्साह और भाईचारे का माहौल बना रहा।
स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने बताया ऐतिहासिक कदम
इस अवसर पर Kultar Singh Sandhwan ने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ों की पुनः शुरुआत एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि पंजाब पशु क्रूरता निवारण (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत किए गए विधायी सुधारों और पशु कल्याण उपायों के कारण संभव हुई है।
उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखती है, बल्कि युवाओं में पारंपरिक खेलों के प्रति नया उत्साह भी जगाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजन युवाओं को खेल के मैदानों की ओर आकर्षित करेंगे और उन्हें नशे व अत्यधिक मोबाइल उपयोग से दूर रखेंगे।
सरकार के प्रयासों की सराहना
पंजाब सरकार के स्टेट मीडिया हेड Baltej Pannu ने आयोजकों और भारी संख्या में पहुंचे दर्शकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ों की वापसी ने पूरे पंजाब में नई खेल भावना भर दी है और किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक की शान को बहाल किया है।
उन्होंने कहा कि Bhagwant Mann के विजन के तहत सुरक्षा प्रबंधों के साथ इन खेलों को दोबारा शुरू किया गया है और लोगों के चेहरों पर खुशी इस प्रयास की सफलता को दर्शाती है।
प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति
इस मौके पर डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) अमरजीत बैंस, एसडीएम लुधियाना पूर्वी जसलीन कौर भुल्लर, एसडीएम उपिंदरजीत कौर बराड़, सहायक कमिश्नर डॉ. प्रगति वर्मा, जिला खेल अधिकारी कुलदीप चुघ सहित कई अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
ग्रामीण ओलंपिक के दूसरे दिन का यह आयोजन पंजाब की जीवंत परंपराओं, सांस्कृतिक गर्व और खेल भावना का प्रतीक बनकर उभरा।
